ट्रंप की चेतावनी से दहला बाजार: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को जोरदार झटका दिया है। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में भारी घबराहट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ईरान को लेकर सख्त टिप्पणी के बाद दुनियाभर के बाजारों में दबाव बढ़ गया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।

बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,000 अंक से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 300 अंक से अधिक टूट गया। बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति करीब ₹7 लाख करोड़ घट गई।

बाजार खुलते ही मची बिकवाली

सुबह करीब 9:50 बजे सेंसेक्स 74,200 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर निफ्टी भी 23,350 के नीचे फिसल गया। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर लाल निशान में दिखाई दिए।

सबसे ज्यादा दबाव पावर, ऑटो और मेटल सेक्टर में देखने को मिला। पावरग्रिड, टाटा स्टील, मारुति, बजाज फाइनेंस, टाइटन और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि आईटी सेक्टर ने कुछ राहत दी। इंफोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा के शेयरों में मजबूती देखने को मिली, क्योंकि कमजोर रुपये का फायदा आईटी कंपनियों को मिल सकता है।

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

शेयर बाजार की गिरावट के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

क्यों टूटा बाजार?

विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि “समय तेजी से निकल रहा है।” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गया।

ब्रेंट क्रूड में करीब 2% तक तेजी दर्ज की गई, जबकि भारतीय बास्केट का तेल भी महंगा हुआ। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर पड़ता है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?

  • रियल्टी सेक्टर में भारी गिरावट
  • ऑटो शेयरों में तेज बिकवाली
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
  • आईटी सेक्टर ने दिखाई मजबूती

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचने और लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहने की सलाह दी जा रही है।

Read more: ट्रंप की चेतावनी से दहला बाजार: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ डूबे

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top