नया लेबर कोड में कर्मचारियों की बल्‍ले बल्‍ले सप्‍ताह में मिलेगी 3 दिन की छुट्टी  और4 दिन करना होगा काम ओवर टाइम काम करने पर मिलेगा डबल पैसा

भारत में नए लेबर कोड्स लागू होने के बाद कर्मचारियों के कामकाजी जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या अब देश में 4 डे-वर्किंग वीक यानी हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का नियम लागू होगा।

New Labour Code 2026: कर्मचारियों की मौज! अब ओवरटाइम पर मिलेगी डबल सैलरी,

क्या है नया प्रावधान ?

1 वहीं, कुछ कंपनियां चाहें तो 5 दिन × 9.5 घंटे या 6 दिन × 8 घंटे का विकल्प भी चुन सकती हैं।

2 कंपनियों को अब यह लचीलापन मिलेगा कि वे कर्मचारियों से हफ्ते में 48 घंटे काम करवा सकती हैं।

3 इसका मतलब है कि अगर कोई कंपनी चाहे तो कर्मचारियों से 4 दिन × 12 घंटे काम करवा सकती है और बाकी 3 दिन छुट्टी दे सकती है।

New Labour Code 2026: कर्मचारियों की मौज! अब ओवरटाइम पर मिलेगी डबल सैलरी, जानें शिफ्ट और पैसों से जुड़े नए नियम

New Labour Codes Overtime Rules 2026: भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए लेबर कोड (New Labour Codes) में कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ओवरटाइम और वर्किंग आवर्स को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं। अब अगर कंपनी आपसे तय समय से ज्यादा काम कराती है, तो उसे आपकी मेहनत का दोगुना दाम चुकाना होगा।

आइए जानते हैं इन नए नियमों से आपकी सैलरी और ऑफिस लाइफ पर क्या असर पड़ेगा।

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1. ओवरटाइम पर मिलेगी डबल सैलरी (Double Pay for Overtime)

नए नियमों के तहत अब कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी। अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट के बाद अतिरिक्त समय देता है, तो उसे डबल भुगतान किया जाएगा।

  • कैलकुलेशन का तरीका: यदि आपने 1 घंटा एक्स्ट्रा काम किया है, तो कंपनी को आपको 2 घंटे के बराबर पैसे देने होंगे।
  • आधार: यह भुगतान आपकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर तय होगा।

समय की गणना के नए नियम:

अक्सर कंपनियां 15-20 मिनट के एक्स्ट्रा काम को नजरअंदाज कर देती थीं, लेकिन अब ऐसा करना गैर-कानूनी होगा:

  • 15 से 30 मिनट: अगर आप 15 से 30 मिनट एक्स्ट्रा काम करते हैं, तो उसे आधा घंटा ओवरटाइम गिना जाएगा।
  • 30 मिनट से ज्यादा: यदि काम 30 मिनट की सीमा पार करता है, तो उसे पूरे 1 घंटे का ओवरटाइम माना जाएगा।

2. वर्किंग आवर्स और ओवरटाइम की सीमा (Work Hours Limit)

कर्मचारियों की सेहत और वर्क-लाइफ बैलेंस को सुधारने के लिए सरकार ने काम के घंटों की एक लक्ष्मण रेखा तय कर दी है:

विवरणनियम (New Rules)
साप्ताहिक कार्य सीमाअधिकतम 48 घंटे (बिना ओवरटाइम के)
डेली शिफ्ट लिमिटओवरटाइम मिलाकर एक दिन में अधिकतम 12 घंटे
तिमाही ओवरटाइम सीमा3 महीने में अधिकतम 125 से 144 घंटे (राज्यों के अनुसार)

. ओवरटाइम पर मिलेगी डबल सैलरी (Double Pay for Overtime)

नए नियमों के तहत अब कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी। अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट के बाद अतिरिक्त समय देता है, तो उसे डबल भुगतान किया जाएगा।

  • कैलकुलेशन का तरीका: यदि आपने 1 घंटा एक्स्ट्रा काम किया है, तो कंपनी को आपको 2 घंटे के बराबर पैसे देने होंगे।
  • आधार: यह भुगतान आपकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर तय होगा।

नौकरी छोड़ने पर 2 दिन में होगा ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट

नए लेबर कोड में एग्जिट पॉलिसी को लेकर भी बड़ा बदलाव हुआ है। अब कर्मचारियों को अपने पैसे के लिए महीनों तक ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे।

  • नियम: इस्तीफा देने, नौकरी से निकाले जाने या छंटनी की स्थिति में कंपनी को 2 वर्किंग डेज (2 कार्य दिवस) के भीतर कर्मचारी का पूरा बकाया पैसा (Full and Final Settlement) चुकाना होगा।
  • इसमें सैलरी के साथ-साथ ओवरटाइम का बकाया भी शामिल होगा।

4. आखिर क्यों बदले गए ये कानून?

सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर उन्हें 4 नए लेबर कोड्स में समाहित किया है। इनका मुख्य उद्देश्य है:

  1. पारदर्शिता: ऑफिस कल्चर में पारदर्शिता लाना।
  2. शोषण पर रोक: कर्मचारियों से बिना पैसे दिए एक्स्ट्रा काम कराने की प्रथा को खत्म करना।
  3. सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और बेहतर वर्किंग कंडीशन प्रदान करना।

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