यदि किसी को सीने में जकड़न या असहजता महसूस होती है तो उनके दिमाग में तुरंत यही सवाल काँधता है कि कहीं उन्हें दिल की बीमारी तो नहीं। लेकिन एक या दो लक्षणों को देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि किसी को हार्ट डिसीज है या नहीं। इसके लिए पर्याप्त जांच करने की जरूरत होती है और दिल से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं होती हैं, जिनका पता लगाने के लिए उतने ही प्रकार के टेस्ट भी मौजूद हैं।
जब कोई दिल से जुड़ी परेशानी लेकर अपने फिजिशियन के पास जाता है तो उसे सबसे पहले ट्रेडमिल पर दौड़ाया जाता है उसके बाद ईकेजी या ईसीजी जांची जाती है। इसके बाद हार्ट रेट, ब्रीदिंग और ब्लड प्रेशर की जांच की जाती है और वर्कआउट की तीव्रता बढ़ाकर भी इसे जांचा जाता है। जब जांच पूरी हो जाती है तो डॉक्टर आपको कॉरोनरी आर्टरी डिसीज होने या नहीं होने की बात बताते हैं। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपकी एक भी हार्ट बीट स्कीप होती है या पकड़ में नहीं आती, जोकि लगभग 35 प्रतिशत महिलाओं में संभव है कि जांच की रिपोर्ट गलत आए। इससे कई बार स्वस्थ महिलाओं को कह दिया जाता है कि उन्हें दिल की बीमारी है। कई बार पुरुषों में अवरुद्ध धमनियों के बारे में गलत रिपोर्ट आती है। इस स्ट्रेस टेस्ट के अलावा कई एडवांस टेस्ट मौजूद हैं, जिनसे हृदय रोगों का सही पता लगाया जा सकता है।
कार्डिएक कैल्शियम स्कोरिंग
एक सीटी स्कैनर हृदय धमनियों में एथ्रोस्केरोटिक प्लाक, जो कि कैल्शियम, कोलेस्ट्रॉल और स्कार टिशूज के कारण बनता है, उसकी जांच करता है। भविष्य में किसी को हार्ट अटैक आने का खतरा है या नहीं इस प्रक्रिया के जरिए पता चल जाता है। कैल्सिफाइड प्लाक कॉरोनरीआर्टिज डिसीज का सबसे प्रमुख संकेत है। इस प्रक्रिया के जरिए कम से कम 10 साल पहले इस बात का पता चल जाता है कि किसी को हार्ट अटैक आ सकता है या नहीं। समस्या का पता जल्दी चल जाने से इससे बचने का उपाय करना अधिक आसान हो जाता है।
कब कराएं: – 50 साल या उससे अधिक उम्र वाले यह जांच करवा सकते हैं या फिर जिनके परिवार में हृदय रोगों की हिस्ट्री रही हो। चूंकि इस जांच में एक्स-रे शामिल है इसलिए ऐसी महिलाएं जो गर्भवती हैं उन्हें यह जांच नहीं करवानी चाहिए।
कैरोटिड इंटीमल मेडिकल थिकनेस टेस्ट
इसमें गर्दन का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। दाएं और बाएं हिस्से के ग्रीवा धमनियों या कैरोटिड आर्टिज की तस्वीरें ली जाती है, जोकि आपके सिर और मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने का काम करती हैं। इससे धमनियों के परत की मोटाई का पता लगाया जाता है। शोध में यह बात सामने आई है कि पौवा धमनियों की असामान्य मोटाई और कॉरोनरी आर्टरी डिसीज में गहरा संबंध होता है। इस टेस्ट के जरिए इस बात का पहले ही पता लगाया जा सकता है यदि रक्तसंचार बाधित होने वाला है। इसमें एक्सरे नहीं होता, इसलिए गर्भवती स्त्रियों के लिए खतरे की बात नहीं होती।
कब कराएं:- यदि किसी की उम्र 40 साल या उससे अधिक है। या जिनके परिवार में किसी को 55 की उम्र के पहले हार्ट अटैक आया हो, उन्हें यह जांच करवानी चाहिए।
हाई सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट
इसमें ब्लड टेस्ट के जरिए सीआरपी की जांच की जाती है। रक्त में एक प्रकार की प्रोटीन की उपस्थिति आपके शरीर के अंदर सूजन का मुख्य संकेत हो सकता है।कोलेस्ट्रॉल प्लाक के कारण ब्लड वेसल्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसकी वजह से सूजन हो सकती है और सीआरपी का स्तर रक्त में अधिक हो सकता है। यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि जिन महिलाओं के सीआरपी का स्तर अधिक है उन्हें हार्ट अटैक होने का खतरा 4 गुना अधिक बढ़ जाता है।
कब कराएं: – 40 साल या उससे अधिक उम्र वाले लोग यह जांच करवा सकते हैं।
एडवांस लिपिड प्रोफाइल एंड लिपोप्रोटीन टेस्ट
परंपरागत कोलेस्ट्रॉल ब्लड टेस्ट जिसमें कुल एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड का पता लगाया जाता है, इस एडवांस प्रकार के टेस्ट में कणों के आकार का भी पता लगाया जाता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कुछ कण बड़े और फूले हुए होते हैं और धमनियों की दीवार के रास्ते में भी आ सकते हैं। कणों के आकार के आधार पर दिल की बीमारियों के खतरे की स्पष्ट रूपरेखा, पारंपरिक जांच की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से खींची जा सकती है।
कब कराएं:- यदि किसी के परिवार में हार्ट डिसीज की हिस्ट्री रही हो, उन्हें यह जांच करानी चाहिए।
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